श्री हिमांशु जैन

आज के युग में अधिकतर मानव विलासिता (Luxury) की जीवनशैली की ओर  जा रहे हैं | लोग कोई भी सामान इसलिए नहीं खरीद रहे की उन्हें  जरुरत है, बल्कि इसलिए खरीद रहे  है,  क्योंकी उनके  पडोसी के पास  वह  वस्तु  है या किसी रिश्तेदार के पास वो चीज है | सब एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा में लगे हुए हैं | यह  दौड़ छोटी से लेकर बड़ी चीजों तक सबमे  चल रही हैं | जिसके पास 50  साड़िया  है, वह  सोच रही है कि  मेरी भाभी, बहन या  पड़ोसन के पास तो 100 साड़िया  है, इसलिये मेरे पास ओर  होनी चाहिए|  जिस व्यक्ति के पास एक कार है वो सोच रहा है मेरे दोस्त के पास तीन है तो में भी ओर  खरीद लेता हूँ |

 

लेकिन कुछ महानुभाव ऐसे भी है जो न्यूनतम वस्तुओं जीवन शैली को अपना रहे है | जिसका तात्पर्य है कम से कम चीजों से काम चलाना, जितना जरुरी हो उतनी ही चीजे स्वयं के  पास रखना | ऐसी ही  कुछ महान विभूतियों  के विषय  में हम जानने की कोशिश करते है जिन्होंने न्यूनतम जीवन शैली को अपनाया |

 

  1. डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम : वे भारत के राष्ट्रपति थे | इनके अंतिम समय के पश्चात् देखा गया की इनके पास 2500 किताबें , 1  घड़ी , 6  शर्ट , 4  ट्रॉउज़र एवं 3  सूट थे | सोचने वाली बात ये है  भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति रहने के  बावजूद भी उन्होंने अपना जीवन न्यूनतम चीजों के साथ जीया |

 

  1. अल्बर्ट आइंस्टीन : वे विश्व के जाने-माने वैज्ञानिक थे जिन्होंने ‘थ्योरी ऑफ़ रिलेटिविटी’ का उपहार मानव जाति को दिया | इन्हे नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया जो की शोध में सबसे उच्चतम सम्मान है | वे  एक ही साबुन से शेविंग करते , उसी से कपडे धोते और उसी से नहाते थे | हम मे से अधिकतर  लोगो के पास नहाने-धोने के लिए 10  से ज्यादा  चीजे होती है जैसे की फेसवाश ,हैंडवाश , शैम्पू , बॉडीवॉश ,  शेविंग क्रीम , नहाने की साबुन , धोने की साबुन , स्क्रब , फेस पैक आदि | आइंस्टीन के पास केवल 1 छड़ी , 1 घड़ी , 1 रुमाल और कुछ सीमित कपडे  थे |

 

  1. मार्क ज़ुकरबर्ग : ये फेसबुक (मेटा ) नामक कंपनी के सीईओ हैं | जिसके उत्पाद अधिकतर लोग उपयोग में लेते है | फेसबुक विश्व की शीर्ष  कंपनियों  में से एक है | जुकरबर्ग के पास सात हज़ार सात सो तीस करोड़ डॉलर है, फिर भी वह  हमेशा ग्रे रंग की ही  टीशर्ट पहनते हैं | इतना पैसा होने के बावजूद भी दिखावा नहीं करते| यह  चाहे तो कपड़ो की दुकान लगा दे , बढ़िया से बढ़िया डिज़ाइनर कपडे पहन सकते है | फिर भी इनका मानना है कि इन्हे  अपना समय छोटे-छोटे निर्णय लेने में व्यतीत नहीं करना चाहिए,  जैसे आज कौनसी शर्ट पहने , आज कैसी पतलून पहने|  यह  अपना कीमती समय अत्यावश्यक  निर्णय लेने में लगाना चाहते  है |

 

  1. बराक ओबामा : ये अमेरिका जैसे महाशक्तिशाली देश के राष्ट्रपति रहे हैं | यह भी ज़ुकरबर्ग की तरह अधिकतर ब्लू या ग्रे रंग के सूट ही पहनते थे | वे सोचते थे की हर आदमी के पास सीमित ऊर्जा है , उस ऊर्जा को वो या तो कपडे पसंद करने में लगा सकते है या अपने देश को आगे ले जाने के लिए निर्णय ले सकते है | क्या कभी हमने सोचा की हम अपनी ऊर्जा का सही उपयोग कर रहे है या उसे व्यर्थ ही नष्ट कर रहे है ?

 

  1. स्टीव जॉब्स : ये एप्पल नमक प्रसिद्ध इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ रहे थे | इस कंपनी ने काफी प्रसिद्ध चीजें बनाई है, जैसे – आईफ़ोन , मैक , आईपैड आदि | एक दिन स्टीव के घर पर पूर्व सीईओ पधारे तो उन्होंने पाया की स्टीव के घर पर बहुत ही कम फर्नीचर है |घर में  सिर्फ जरुरी सामान जैसे पलंग, कुर्सी , टेबल ही रख रखे थे | ये देखकर पूर्व सीईओ को काफी आश्चर्य हुआ की इतने अमीर होते हुए भी इनके पास इतना कम सामान कैसे? स्टीव मानते थे जितना ज्यादा सामान रखेंगे उतना  ही उनका समय  सामान को साफ़ करने में, व्यवस्तिथ रखने में और चीजों को ढूंढने जैसे कार्यो  में व्यर्थ होगा |

 

हमने देखा कि कुछ महानुभाव कैसे न्यूनतम साधनशैली को अपनाकर अपने जीवन में आगे बढ़ रहे है |  आइये हम न्यूनतम साधनशैली के कुछ ओर  फायदे समझते है –

 

  1. अधिक उत्पादकता – यदि हमारे पास सीमित विकल्प होंगे तो हम कम समय बर्बाद होगा और उस समय का उपयोग अच्छे कार्य हेतु कर सकेंगे |

 

  1. कम तनाव – हमें जितना कम प्रतिस्पर्धा में दौड़ेंगे , एक-दूसरे के पास के चीजों की जितनी कम तुलना करेंगे उतना ही तनाव कम होगा |

 

  1. कम व्याकुलता – अगर हम अपनी इच्छाओं पर लगाम लगाएं तो हमारा मन भी कम व्याकुल होगा|

 

  1. कम खर्च, ज्यादा बचत – जितना कम परिग्रह रखेंगे उतना ही खर्च कम होगा और स्वयं की बचत में वृद्धि होगी |

 

  1. ज्यादा शांति – हमें जितना कम निर्णय लेने होंगे, उतना ही हमारा दिमाग शान्त रहेगा।

 

  1. ऊर्जा की बचत – हर निर्णय लेने में हमारी ऊर्जा खर्च होती है, अगर हम सीमित खरीददारी करेंगे तो कम निर्णय लेने पड़ेंगे | अगर हमारे पास सीमित संसाधन होंगे तो हमें कौन सा उपयोग करना है यह निर्णय लेने के लिए ऊर्जा नहीं लगानी होगी | जैसे अगर आपके पास 4-5 वाहन  है तो आपको यह सोचने के लिए की कौनसा वाहन ले जाना है, इसके लिए ऊर्जा लगानी  होगी | अतः सीमित वाहन हो तो स्वतः ही ऊर्जा की बचत हो जाएगी |

 

  1. समय की बचत – वस्तुओं का परिग्रह जितना काम होगा , उतना ही उन्हें संभालने में कम समय भी लगेगा |

 

  1. पहिचान (iconic) – क्या हमारे व्यवहार जगत के सुपर हीरो, पुलिस और गुरु भगवंत रोजाना अलग-अलग तरह के कपडे पहनते है? क्यों हम दूर से देखकर ही पुलिस, गुरु भगवंत आदि को पहचान जाते है? क्योंकि वे एक पोशाक पहनते है जो रोजाना नहीं बदलती | यदि  हम भी रोजाना एक रंग की पोशाक पहने तो लोग दूर से ही हमें  पहचान लेंगे |

 

हम कई बार अपनी इच्छाओं को जरूरतों से ज्यादा प्राथमिकता दे देते है | पारिणामतः हम एक के बाद एक चीजे खरीदते जाते है और परिग्रह को बढ़ाते जाते है | जैन धर्म के ग्रंथ में भी इस  संदर्भ में बताया गया हैं । आगम कारो ने अपरिग्रह के सिद्धांत के ऊपर जोर देकर  बताया है कि मकान, जमीन, सोना, चांदी, खाने की सामग्री, पहनने के सामान , घर के सामान, वाहन  आदि हर चीज में हमें एक सीमा तय करनी चाहिए | आजकल अधिकतर  घरो की अलमारियों  में इतने कपडे होते है की उन्हें  खोलते की कपडे गिर जाते हैं|  समझ में ही  नहीं आता की कोई उत्सव  हो तो कौन-सा  पहने, कहीं जाना है कौन-सा  पहने, ये कपडे तो सबने देख लिए है | दिवाली पर बोलते है की इस अलमारी में एक भी कपडा नया नहीं है और होली पर कहते है की अलमारी में एक भी कपडा पुराना नहीं है |

 

ख़रीदो केवल आवश्यक वस्तुएँ  – बचे इच्छाओ की आपूर्ति से

 

क्या आप भी न्यूनतम जीवनशैली अपना कर देखना चाहेंगे?

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