LGBTQIA+ के हर अक्षर के मायने जानें…

L – ‘लेस्बियन’: यानी एक महिला या लड़की का समान लिंग के प्रति आकर्षण। इसमें दोनों पार्टनर महिला ही होती हैं। कई बार किसी एक पार्टनर का लुक, पर्सनालिटी पुरुष जैसी हो सकती है या नहीं भी हो सकती है।

G – ‘गे’: जब एक पुरुष को एक और पुरुष से ही आकर्षण हो तो उन्हें ‘गे’ कहते हैं। ‘गे’ शब्द का इस्तेमाल कई बार पूरे समलैंगिक समुदाय के लिए किया जाता है, जिसमें ‘लेस्बियन’, ‘गे’, ‘बायसेक्शुअल’ सभी आ जाते हैं।

B – ‘बायसेक्शुअल’: जब किसी पुरुष या महिला को पुरुष और महिला दोनों से ही आकर्षण हो और सेक्शुअल रिलेशन भी बनाते हों तो उन्हें ‘बायसेक्शुअल’ कहते हैं। पुरुष और महिला दोनों ही ‘बायसेक्शुअल’ हो सकते हैं। दरअसल एक इंसान की शारीरिक चाहत तय करती है कि वो L है G है या फिर B है।

T- ‘ट्रांसजेंडर’: वह इंसान जिनका शरीर पैदा होते समय कुछ और था और वह बड़ा होकर खुद को एकदम उलट महसूस करने लगे। जैसे कि पैदा होने के वक्त बच्चे के निजी अंग पुरुषों के थे और उसका नाम लड़के वाला था मगर कुछ समय बाद उसने खुद को पाया कि वो तो मन से लड़की जैसा महसूस करता है। इस पर कुछ लोग लिंग परिवर्तन भी कराते हैं। लड़के लड़कियों वाले हार्मोंस डलवा लेते हैं जिससे स्तन उभर आते हैं। ये लोग ‘ट्रांसजेंडर’ हैं। इसी तरह औरत भी मर्द जैसा महसूस करती है तो वो मर्दों की तरह लगने के लिए चिकित्सा का सहारा लेती है। वह भी‘ट्रांसजेंडर’ है।

Q – ‘क्वीर’: ऐसे इंसान जो न अपनी पहचान तय कर पाए हैं न ही शारीरिक चाहत। मतलब ये लोग खुद को न आदमी, औरत या ‘ट्रांसजेंडर’ मानते हैं और न ही ‘लेस्बियन’, ‘गे’ या ‘बायसेक्शुअल’, उन्हें ‘क्वीर’ कहते हैं। ‘क्वीर’ के ‘Q’ को ‘क्वेश्चनिंग’ भी समझा जाता है यानी वो जिनके मन में अपनी पहचान और शारीरिक चाहत पर अभी भी बहुत सवाल हैं।

I- ‘इंटरसेक्स’: इंटरसेक्स सोसायटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका के मुताबिक, यह शब्द उन लोगों को परिभाषित करता है जो महिला या पुरुष के सामान्य प्रजनन अंगों के साथ पैदा नहीं होते हैं। वे लोग जो बाहर से तो महिला या पुरुष लगते हैं, लेकिन उनके प्रजनन अंग उस जेंडर से मेल नहीं खाते।

A- ‘एसेक्शुअल’ या ‘एलाई’: इस अक्षर के दो मायने हो सकते हैं। पहला है एसेक्शुअल- यह शब्द उन लोगों के लिए जो इस्तेमाल होता है जो किसी जेंडर के प्रति सेक्शुअल अट्रैक्शन महसूस नहीं करते। ये लोग किसी के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप में तो आ सकते हैं, लेकिन सेक्शुअल रिलेशंस नहीं बना पाते। ऐसा किसी मनोरोग या डर के कारण नहीं होता है, बस इन्हें सेक्शुअल फीलिंग नहीं आती।

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