पुष्कर के पास प्राचीन बैजनाथ महादेव शिव मंदिर की पहाड़ी पर हैवानीयत का शिकार बनी 11 साल की मासूम अकेली नहीं बल्कि ग्रामीणों के साथ बकरियां चराने गई थी। वह 7वीं क्लास में पढ़ती थी। कोरोना में स्कूल बंद होने से इन दिनों घर के काम ही करती थी। कुत्तों के हमले की सूचना पर वह बकरियों को बचाने के लिए ग्रामीणों से अलग हुई और बाद में वापस नहीं लौटी। इस बीच, उसका रेप कर हत्या कर दी गई। जब देर शाम तक वह घर नहीं लौटी तो उसकी तलाश की गई और उसका शव पहाड़ी पर झाड़ियों के बीच मिला।

पुलिस ने जब इस घटना के बारे में ग्रामीणों से पड़ताल की तो पता चला कि मासूम बालिका बकरियों को चराने के लिए 5-6 ग्रामीणों के साथ गई थी । दिनभर बकरियां चराई और शाम को वह अपने साथियों के साथ साथ बैठी थी। करीब 5 बजे एक सात से आठ साल के बच्चे ने बताया कि उसकी बकरियों को कुत्ता खा रहा है।

इस पर वह बकरियों को बचाने के लिए ऊपर पहाड़ी की तरफ चली गई, जहां बकरियां चर रही थीं।

ग्रामीणों ने बताया कि शाम हो रही थी और जब बालिका वापस नहीं लौटी तो कुछ देर तो इंतजार किया, लेकिन इसी बीच अन्य ग्रामीणों ने सोचा कि वह बकरियां लेकर घर आएगी, इसके बाद अन्य लोग घर लौट गए। जब वह शाम को नहीं लौटी तो उसको तलाश किया गया। इस दौरान उसके चप्पल और कुल्हाड़ी के बाद शव मिल गया। ग्रामीणों को अंदेशा है कि जब वह शाम के समय बकरियों को हमले से बचाने के लिए ऊपर की तरफ गई तो इस दौरान ही वह कुछ लोगों के हत्थे चढ़ गई और उसके साथ यह वारदात अंजाम दे दी गई ।

मासूम 7वीं कक्षा में थी

मृतका कक्षा 7 में पढ़ती थी। लॉकडाउन के कारण अभी स्कूल नहीं जा रही थी। ऐसे में उसे अन्य बच्चों के साथ बकरियां चराने के लिए भेजा जाता था। उस के 4 बड़ी बहन व एक बड़ा भाई व एक छोटी बहन है।

बेलदारी कर गुजर बसर करते पिता ग्रामीणों ने बताया कि मृतका के पिता बेलदारी का काम करते हैं और मां बकरियां चराने के साथ घर का काम करती है। दिहाड़ी के रूप में मिलने वाली मजदूरी से ही उनका घर चलता है। परिवार बड़ा है। परिवार में 6 बहनें और एक भाई है। बहनों में वह 5वें नंबर पर थी। हादसे के बाद से पूरा परिवार टूट गया है।

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