कोरोना संक्रमित बच्चा अगर अस्पताल में भर्ती है तो उसके अभिभावक (माता-पिता) को कोविड वार्ड में प्रवेश दिया जा सकता है। उन्हें पीपीई किट पहनकर वहां रुकने की अनुमति दी जानी चाहिए। तीसरी लहर के मद्देनजर दिल्ली सरकार की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने यह सुझाव दिया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जल्द इस पर फैसला लेंगे।

समिति ने सुझाव दिया कि आईसीयू में बच्चों की देखभाल के लिए और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है। पीडियाट्रिक आईसीयू तैयार करने की बात कही है। तीसरी लहर के लिए 10 हजार से ज्यादा आईसीयू बेड बनाने की योजना बनाई गई है। यह ऑक्सीजन बेड से अलग होंगे।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अभिभावकों को तभी कोविड वार्ड में प्रवेश मिलेगा, जब बच्चा बहुत रो रहा हो। बगैर माता-पिता के उसे हैंडल करना मुश्किल हो रहा हो। यह नियम 14 साल से कम उम्र के बच्चों पर ही लागू होगा।

अस्पताल में अभिभावकों को रुकने के लिए अलग से केंद्र बनाया जाएगा। बच्चों को कैसे संभाला जाए, कैसे इलाज किया जाए, इसके लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की टीम बनाने की बात कही गई है।

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