आगरा के पुष्पांजलि होम्स में रहने वाले जूता कारखाना मालिक नरेश की हत्या का तानाबाना उसकी पत्नी प्रमिता ने ही बुना था। पत्नी के आशिक ने अपने भाई के साथ मिलकर हत्याकांड को अंजाम दिया था। पुलिस ने पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार किया है। एक हत्यारोपी फरार है। उसकी तलाश की जा रही है।

नरेश का शव घर के पीछे कूड़े के ढेर में बोरे में बंद मिला था। पत्नी ने अपने ससुरालीजनों को गोबर चौकी से फोन करके बुलाया था। यह बताया था कि रात साढ़े ग्यारह बजे से पति गायब हैं। मोबाइल भी नहीं मिल रहा है। घरवाले नरेश की तलाश में जुटे थे। घर के पीछे बोरे में शव मिला था। पास ही खून से सने कपड़े, चादर, तकिया आदि सामान पड़ा हुआ था। घर की छत पर भी खून था। बच्चों ने बताया था कि तकिया और चादर उनके घर की है। घर में हत्या हुई थी। घर में सिर्फ नरेश की पत्नी घर पर मौजूद थी। तीनों बच्चे बहुत छोटे हैं। पुलिस का पहना शक पत्नी प्रमिता पर ही गया था।

एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि इंस्पेक्टर ताजगंज उमेश त्रिपाठी ने शक के आधार पर पत्नी से पूछताछ शुरू की। पत्नी ने चंद मिनट में सच्चाई कबूल कर ली। उसे बताया गया कि पुलिस को सीसीटीवी फुटेज मिला है। उसमें वह व्यक्ति कैद है जो रात को उनके घर आया था। प्रमिता ने पुलिस को बताया कि ग्राम नगला केवल, शिकोहाबाद, फिरोजाबाद निवासी रविकांत से दो साल पहले उसकी पहचान हुई थी। दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। एक दूसरे को प्यार करने लगे। दोनों एक दूसरे के घर आया-जाया करते थे। पति को यह जानकारी हो गई। वह इसी बात पर उसे बेइज्जत करने लगे। आए दिन उसके साथ मारपीट करने लगे। उसने ठान लिया कि रविकांत के साथ रहेगी। पति इसमें रोड़ा थे। इसलिए उन्हें रास्ते से हटाने की योजना रविकांत के साथ बनाई। रविकांत का भाई शशिकांत भी इसमें शामिल हो गया।

छत पर छिपा हुआ था आशिक और उसका भाई
प्रमिता ने पुलिस को बताया कि रविकांत अपने भाई शशिकांत के साथ बाइक पर आया। उनके घर के पास एक मकान खाली पड़ा है। उसके जरिए छत के रास्ते उनके घर आया। रविकांत ने अपना मोबाइल बंद रखा था। रात को प्रमिता ने बच्चों को कोल्ड ड्रिंक दी। मोबाइल दिया। कमरे का टीवी चला दिया। बच्चे खुश हो गए। बाहर से कुंडी बंद कर दी। पति ने शराब पी रखी थी। साढ़े दस बजे वह गहरी नींद में सो गए। उसने शशिकांत के मोबाइल पर ओके का मैसेज भेजा। दोनों नीचे आ गए। सोते समय पति के सिर पर ईंट से ताबड़तोड़ प्रहार किए। बिस्तर पर खून बिखर गया। शव को बोरे में बंद किया। उठाकर छत पर ले गए। पीछे फेंक दिया। खून से सने कपड़े भी वहां फेंक दिए। रात को अंधेरा था। छत पर खून पड़ा रह गया था। वह घबरा गई थी। इसलिए उन्हें साफ नहीं कर पाई। हत्या के बाद रविकांत और शशिकांत रात को ही चले गए थे।

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