एक आरटीआई के जवाब से खुलासा हुआ है कि केंद्र सरकार ने वैक्सीनेशन को लेकर भले ही कितने दावे किए हों लेकिन बजट में तय ₹35,000 करोड़ में से सिर्फ ₹4,488 करोड़ ही खर्च किए हैं। इस तरह साल के आखिर तक 30 फीसदी आबादी को वैक्सीन लगना भी मुश्किल ही है।

कोरोना काल में देश इस समय वैक्सीन की भारी किल्लत से जूझ रहा है और हजारों लोगों की जान इस महामारी में जा रही है। इस सबके बीच एक आरटीआई में सामने आया है कि सरकार ने 28 मई 2021 तक वैक्सीन पर सिर्फ 4,488 करोड़ रुपए ही खर्च किए हैं।

ध्यान रहे कि मोदी सरकार ने 2021 के बजट में कोरोना संकट से निपटने और वैक्सीन आदि के लिए 35,000 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा था कि देश को कोरोना से बचाने के लिए सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के अलावा और भी कई वैक्सीन उपलब्ध होंगी।

लेकिन आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने 28 मई तक सीरम इंस्टीट्यूचट और भारत बायोटेर से वैक्सीन की सिर्फ 29 करोड़ डोज ही हासिल की हैं।

आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि, “केंद्र सरकार के 2021-22 के बजट में वैक्सीनेशन के लिए 35,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गयया था। इसमें से 4,488 रुपए ही एचएलएल को सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक से वैक्सीन खरीदने के लिए दिए गए हैं।” एचएलएल केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित एक सरकारी उपक्रम है जो कंडोम, कंट्रासेप्टिव और आयुर्वेदिक उत्पाद बनाती है।

महाराष्ट्र के नागपुर के आरटीआई कार्यकर्ता मोहनीश जबालपुरे की आरटीआई अर्जी के जवाब में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने 28 मई तक सीरम इंस्टीट्यूट से 21 करोड़ और भारत बायोटेक से 7.5 करोड़ वैक्सीन की खुराकें खरीदी हैं। साथ ही कहा गया है कि वैक्सीन खरीदने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

गौरतलब है कि शनिवार को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने दावा किया कि कि कोरोना वैक्सीनेशन ड्राइव में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए शुक्रवार तक 28.86 करोड़ वैक्सीन की डोज लोगों को लगाई हैं। मंत्रालय के मुताबक वैक्सीनेशन ड्राइव के 133वें दिन (यानी 28 मई, 2021 को) भारत ने कुल 28 लाख 7हजार 411 वैक्सीन की खुराकें लगाई हैं। इनमें से 25 लाख 99 हजार 754 लोगों को पहली डोज और 2 लाख 7 हजार 657 लोगों को दूसरी डोज दी गई है।

लेकिन सरकार के आलोचकों का मानना है कि वैक्सीनेशन को लेकर सरकार के आंकड़े सही नहीं हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को ही प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि, “मोदी की नौटंकी और कुप्रबंधन ही देश में कोरोना की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार है। हम दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन निर्माता हैं लेकिन सिर्फ 3 फीसदी आबादी को ही अभी तक पूरी तरह वैक्सीन मिली है।”

विशेषज्ञ मानते हैं कि बीजेपी नेताओं और केंद्रीय मंत्री भले ही कोई भी दावा करते रहें लेकिन साल के अंत तक पूरे देश को वैक्सीन लगाना तो दूर, 30 फीसदी आबादी को वैक्सीन लगाना भी मुश्किल ही है।

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