कोरोना की दूसरी लहर थमने का नाम नही ले रही । संक्रमण मरीजों को मौत की नींद सुला रहा है। ओर परिवारों की खुशियां छिन रहा है। बारां जिले के अंता कस्बा निवासी महिला डॉक्टर कोरोना से जंग हार गई। महिला डॉक्टर ने 25 दिन पहले ही बेटे को जन्म दिया था। वो ढंग से बेटे को देख भी नही सकी। 15 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद उसकी सांसे टूट गई। उसकी मौत से मासूम के सिर से मां का साया उठ गया। पूरा परिवार पर सदमें में है। डॉक्टर कृष्णा मीणा ( 34 ) अंता में आयुष डॉक्टर थी। पति डॉ कमल मीणा MD मेडिसिन अंता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापित

डॉ कृष्णा के भाई डॉक्टर भोजराज मीणा ने बताया कि कृष्णा के 1 तीन साल की बेटी है । चाचा ताऊ के 7 भाइयों में एकलौती बहिन थी। 19 अप्रैल को निजी अस्पताल में सिजीरियन हुआ था। बेटा पैदा हुआ था। परिवार में खुशी का माहौल था। अस्पताल से अंता घर लौटते समय बुखार आ गया। दूसरे दिन जांच करवाई। पॉजिटिव मिली। सीटी स्कोर 17 आया। उन्हें तुरन्त मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। 7 दिन वेंटिलेटर पर रखा। रिकवरी होने लगी थी। सेचुरेशन भी 95 आ गया था। उन्हें ऑक्सीजन पर लिया गया।

लेकिन फिर एक दम से तबियत बिगड़ने लगी । दुबारा बाइपेप पर लेना पड़ा। प्लाज्मा चढ़ाया गया। रेमडेसिविर इंजेक्शन लगे। लेकिन कोई फर्क नही पड़ा। हार्ट तक इंफेक्शन फैल गया। कोर्डिक अरेस्ट के कारण अचेत हो गई। शनिवार अल सुबह डॉ कृष्णा ने दम तोड़ दिया। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान परिवार के सदस्यों ने अच्छी तरह से देखभाल की । अस्पताल में भी बेहतर इलाज मिला।चाचा के दो लड़के अस्पताल में सेवा करते हुए संक्रमित हुए। जबकि कृष्णा की ननद भी कोरोना पॉजिटिव हुई। पति डॉक्टर कमल मीणा ने वैक्सीन की दो डोज ले रखी थी। इस कारण वो संक्रमित नहीं हुए।

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