ये सामान्य लक्षण कोरोना के हो सकते हैं:—

1-हल्की सर्दी का अहसास होना,

2-नाक बहती हो, (कई बार नहीं भी बहती)

3-सूखी खांसी हो,यानि जब मुहँ से बलगम न निकले,

4—हल्का बुखार हो जाना(यह लक्षण मुख्य है),

5—ऑक्सिजन लेवल 90 से नीचे आ गया हो,

6—साँस लेने में तकलीफ आ रही हो,(यह केवल गम्भीर हालत में होता है)

7—गले में खराश मालूम होने लगे (कई बार नहीं भी होती)

8—पेट खराब या डायरिया हो रहा हो।

सावधानियाँ:—अगर बुखार के साथ साथ साँस लेने में दिक्कत हो रही हो,तो फौरन सावधान हो जाइये,यह गम्भीर स्थिति का संकेत है।

वैसे कई बार नाक बहना और जुकाम एलर्जी से भी हो जाता है।बुखार भी कई बार किसी और वजह से हो जाता है,तो घबराइये मत,बेहतर है डॉक्टर से मिल कर कारण जान लें।सरकारी गाइड लाइन फॉलो कीजिए।

बचाव के आयुर्वेदिक उपाय:—

1, अगर कुछ असामान्य लगे,तो सबसे पहले बुखार ही नापिये।बुखार हो,तो संजीवनी की २ टेबलेट लीजिये।,और डॉक्टर से मिलें।

2, गिलोय वटी इम्यूनिटी बढ़ाती है,रोज दो टेबलेट लीजिये।

3, स्टीम लेना बहुत फायदा देता है।दिन में 2–3 बार सामान्य पानी की स्टीम लें।

4, दिन में एक कप तेज गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी तीन बार लें।

5, गले में फिटकरी या नमक के गर्म पानी से गरारे करें।मुहँ में चारों तरफ गर्म पानी घुमाइये।

6 ,इन गर्मियों में जब तक कोरोना फैला हुआ है, ए सी से दूर रहे !

7, रुमाल में कपूर और अजवायन बाँध कर 1–2 घण्टे बाद सूंघते रहिए,इससे स्वास नली खुली रहती है व ऑक्सिजन लेवल नहीं गिरेगा।पहाड़ी लोग पहाड़ की चढ़ाई में यही सावधानी करके मस्त रहते हैं।

8, बाहर से वापस घर आएँ,तो ऊपर के कपड़े बदल डालिये।

9,, बाहर से आकर शरीर का जो हिस्सा खुला था,उसे साबुन के पानी से साफ कीजिये, मुहँ और बाजू धो डालिये।

10, छोटे गीले तौलिये से बालों को पौन्छिये।

11, शूज,सैन्डल घर के कमरों में मत लाइये,शू-रैक पर रखिये।

12, सब्जी-फल लाए हों तो तुरंत किचन के सिंक में नल से उन्हें धोने के बाद इस्तेमाल करिये।

13- दवा लाए हों,तो दवा के रैपर को भी नल के नीचे करके धो लीजिये।रैपर पानी से खराब नहीं होता।

14, अगर आप व्हीकल लेकर गए थे,तो उसे सेनेटाइज करिये।

15, इन दिनों में न किसी के घर जाइये, न किसी को बुलाइए।

सांप और मेंढक की कहानी बताना प्रासंगिक है इससे सीख मिलती है

सांप और मेंढक में एक दिन बहस हो गई।

सांप इतरा कर बोला—-“मेरा काटा पानी भी नहीं मांगता।”

मेंढक ने जबाब दिया—- “लोग जहर से नहीं ,तुम्हारी दहशत से मर जाते हैं।”

दोनों ने बहस का हल निकालने के लिये एक युक्ति सोची।

तभी एक राहगीर आया,सांप ने उसे छुप कर काटा,लेकिन मेंढक उसकी टांगों के बीच से निकल कर भागा।

राहगीर ने सोचा अरे मेंढक ने ही तो काटा है,और निश्चिंत होकर घर चला गया, उसे कुछ भी नहीं हुआ!

तभी दूसरा राहगीर आ गया,और मेंढक ने उसे छुप कर काटा।मगर तुरंत सामने सांप फन फैलाकर खड़ा हो गया।राहगीर ने सोचा उसे सांप ने काट लिया। वह सांप की दहशत से ही तुरंत मर गया।

यानि दहशत ने दूसरे राहगीर को मारा,जहर ने नहीं!

इसलिए घबराने से यह बीमारी (कोरोना) भी हावी हो जाती है।सतर्क रहिए, मगर मन में भय मत पालिये।कोरोना से कुछ हो या न हो,किन्तु घबराने से हार्ट अटैक आ सकता है!

कोरोनावायरस को मात देने वाले लोगों को दिल के दौरे क्यों आ रहे हैं?
न्यूयॉर्क में Northwell Health के डायरेक्टर Dr. Eric Cioe-Peña के मुताबिक नाक, मुंह या आंखों से होते हुए वायरस रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट तक पहुंचते हैं और वहां से फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। इसके बाद का वायरस का सफर और खतरनाक होता है क्योंकि ये सीधे खून के जरिए शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंच जाते हैं।

बहुत से मरीज, जिनमें हार्ट की कोई समस्या नहीं थी, कोरोना इंफेक्शन से ठीक होने के बाद दिल के दौरे से उनकी मौत हो गई। ऐसा क्यों हुआ? डाक्टरों द्वारा किए गए शोध में पाया गया है कि कोरोनावायरस होने के बाद जो लोग ठीक हो रहें, उन्हें अभी भी जान का खतरा है, क्योंकि उनके खून में थक्के जमने शुरू हो गए हैं और उनका खून भी गाड़ा हो गया है।

डाक्टरों ने कहा है कि इस तरह के मरीजों को समय-समय पर जांच करवाते रहना चाहिए और डाक्टर की सलाह के अनुसार खून को पतला करने की दवा को अपनी जेब में ही रखना चाहिए, ताकि समस्या आने पर उसका उपयोग किया जा सके। डाक्टरों के मुताबिक कोरोनावायरस से ठीक होने के बाद खून के थक्के जमने का असर 6 महीने तक रह सकता है।

इस लिए दिल के दौरे से बचने के लिए इन बातों का पूरा ध्यान रखें और समय-समय पर डाक्टर से जांच करवाते रहे।

स्वर्ण भस्म कैसे तैयार की जाती है? इसका उपयोग किस प्रकार कोरोना की बिमारी में किया जा सकता है?आओ जाने,

स्वर्ण भस्म आयुर्वेद की सुप्रसिद्ध औषधि है | आम जनता में इसके लिए काफी जिज्ञासा रहती है कि स्वर्ण भस्म क्या है एवं इसके क्या फायदे होते है |

आयुर्वेद में खनिज पदार्थों से दवाओं का निर्माण करने की विधा प्राचीन है | शायद जब पूरे विश्व में सोने के बारे में ज्ञात नहीं था उस समय भारत में इस धातु को शुद्ध करके चिकित्सा के लिए प्रयोग किया जाता था |

स्वर्ण भस्म को पुटपाक के माध्यम से तैयार किया जाता है | “पुटपाक” आयुर्वेद में अग्नि देने का एक माप कहा जा सकता है |

यहाँ मैं आपको स्वर्ण भस्म बनने की शास्त्रोक्त विधि बता रहा हूँ | वैसे स्वर्ण भस्म बनाने की विधि काफी है लेकिन यहाँ मैं आपको एक विधि बता रहा हूँ जिसका निर्माण मैंने स्वयं श्री धन्वंतरि औषधालय जयपुर में सीखा है |

सबसे पहले शुद्ध कटंक वेधी स्वर्ण के पत्रों को बारीक़ बारीक़ क़तर लिया जाता है | अब इसमें दुगना पारा मिलाकर दोनों को एकत्र घोंट कर पिष्टी बना ली जाती है | इस पिष्टी को तुलसी पत्र के रस में तीन दिन तक लगातार मर्दन कर टिकिया बना ली जाती है इसे कज्जली कहते है | अब इसे धूप में सुखा कर मिट्टी के बने सराव सम्पुट में बंद करके आधा सेर कन्डो में फूंक देते है | इसी प्रकार से 5 से 7 पुट देने से भस्म तैयार हो जाती है |वर्तमान में Covid की प्रोटेक्शन में आयुर्वेद में इससे बेहतर कुछ नहीं है,इसके बने योग अति उपयोगी साबित हो रहे है।

शास्त्रों के अनुसार निम्न रोगों में स्वर्ण भस्म का प्रयोग किया जाता रहा है |

टीबी जैसी संक्रामक रोग में
संग्रहणी रोग
जीर्ण ज्वर
स्नायुदौर्बल्य
नपुंसकता
हृदय कमजोर में
पित्त प्रधान प्रमेह
प्रदर रोग
हृदय एवं मस्तिष्क विकार
यकृत रोगों आदि को बल देने वाले व जटिल रोगों को नष्ट करने वाले गुण मौजूद रहते है।

(डॉ पीयूष त्रिवेदी, आयुर्वेद चिकित्साधिकारी, राजस्थान विधानसभा, जयपुर)
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