दिल्ली 14 मई । कुछ सप्ताह पहले तक दुनिया भर के देशों को कोरोना की वैक्सीन निर्यात करने वाला भारत अब ख़ुद ही टीकों की कमी से जूझ रहा है.

भारत उन देशों में गिना जाता है जिसकी टीके बनाने की क्षमता कई विकसित देशों से ज़्यादा है.

वैक्सीन का निर्यात अब रोक दिया गया है जिससे कई देशों को वैक्सीन नहीं मिल पा रही है, जबकि सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश ने टीका इम्पोर्ट करने का ग्लोबल टेंडर जारी किया है.

देश भर में टीका लगाने वाले सैकड़ों केंद्र वैक्सीन ना उपलब्ध होने के कारण बंद कर दिये गए हैं.

आप में से वो लोग जो रोज़ आरोग्य-सेतु ऐप और कोविन वेबसाइट पर टीके के लिए रजिस्टर कराने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं उन्हें अंदाज़ा होगा कि यह कितनी बड़ी चुनौती है.

कई देशों में नहीं शुरू हो सका टीकाकरण
दुनिया में ऐसे दर्जनों देश हैं जहाँ कोरोना टीकाकरण शुरू नहीं हो सका है क्योंकि उनके पास टीका खरीदने के लिए पैसे और इसे बनाने के लिए साधन नहीं हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक पिछले साल से बार-बार ये कहते आ रहे हैं कि ग़रीब और कम आय वाले देश टीकाकरण में पीछे छूट गए हैं.

उन्होंने पिछले महीने ही धनी देशों की आलोचना करते हुए कहा था कि वो अपनी खुद की आबादी के लिए ज़रूरत से ज़्यादा वैक्सीन ऑर्डर कर रहे हैं और ग़रीब देशों की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

उन्होंने पिछले महीने कहा था कि दुनिया भर में लगाए गए टीकों का केवल 0.3% गरीब देशों में लोगों तक पहुँचा है.

बीबीसी को मिले आंकड़ों के मुताबिक़ 10 मई तक दुनिया भर में 1.30 अरब वैक्सीन डोज़ लगाए जा चुके थे जिनमें 32.6 करोड़ वैक्सीन के साथ चीन सबसे आगे है.

अमेरिका दूसरे स्थान पर है और अब तक उसने लगभग 26 करोड़ लोगों को टीके लगाए हैं.

यूरोपीय संघ ने 17.2 करोड़ और चौथे नंबर पर भारत ने 17 करोड़ लोगों को टीके दिए हैं. लेकिन अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई ग़रीब देशों में वैक्सीन देने की रफ़्तार बहुत सुस्त है.

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