कोलकाता, 14 मई । मौत का पर्याय बन चुके कोविड-19 महामारी से देश भर में जिस तरह से मौतो का सिलसिला जारी है उससे आम जनों में खौफ और दहशत बढता जा रहा है । हर रोज किसी न किसी अपने को खो रहे भारतीय समाज के मन से इस डर को दूर करने के लिए “हिन्दुस्थान समाचार” ने अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन लोगों से बात की है जिन्होंने न केवल इस जानलेवा महामारी को मात दी, बल्कि इसकी चपेट में आए लोगों के लिए प्लाज्मा आदि दान कर महामारी के सामने ढाल बनकर खड़े हो गए हैं।
इन में से एक नाम है जय प्रकाश मिश्रा का।

बंगाल के एक बड़े हिंदी दैनिक अखबार के संपादक रह चुके जय प्रकाश फिलहाल राज्य सचिवालय नवान्न में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अधीनस्थ सूचना और संस्कृति विभाग में अहम पद पर कार्यरत हैं। कुछ दिनों पहले वह कोविड-19 की चपेट में आए थे लेकिन अब स्वस्थ हो चुके हैं और लोगों को इससे बचने के बारे में उपाय भी बता रहे हैं। विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि कोविड-19 का तूफान आज नहीं तो कल थम ही जाएगा लेकिन जब यह रुकेगा तब हम समझ सकेंगे कि लोग महामारी से कम तथा डर, दहशत और सामाजिक बहिष्कार की वजह से बड़ी संख्या में मौत के शिकार हुए हैं।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने हमारे समाज के नकारात्मक पहलू को ज्यादा उजागर किया है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जब वह पॉजिटिव हुए थे तो उनके घर नियमित तौर पर काम करने वाली नौकरानी को आसपास के लोगों ने यह कह कर दहशत में डाल दिया था कि अगर वह घर पर काम करने जाएगी वह भी संक्रमित हो जाएगी। इस वजह से वह काम पर नहीं आई। जबकि उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने महामारी से बचाव के लिए सभी प्रोटोकॉल का सावधानी से पालन करते हुए उनका बखूबी साथ दिया। परिवार में पत्नी और बच्चे हैं लेकिन जय प्रकाश के अलावा कोई भी अन्य सदस्य पॉजिटिव नहीं हुआ।
परिवार का कोई सदस्य पॉजिटिव हो तो बनें सहारा
– उन्होंने बताया कि जब वह संक्रमित हुए तब खुद को आइसोलेट कर लिया और परिवार के सदस्यों से दूर रहने लगे। घर वालों ने भी पूरे प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उन्हें भोजन पानी आदि देना जारी रखा। डॉक्टरों की सलाह से वह नियमित दवा लेते रहे और आराम से 14 दिनों के अंदर स्वस्थ हो गए। मिश्रा ने कहा कि कोविड-19 जानलेवा नहीं है और इसका कारगर इलाज है। इसलिए परिवार के किसी सदस्य के पॉजिटिव होने पर डरने की जरूरत नहीं है बल्कि प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उसका सहारा बनना जरूरी है।

नकारात्मक मीडिया रिपोर्टिंग सबसे घातक
– उन्होंने कहा कि मीडिया ने पूरे देश में एक दहशत का माहौल बना रखा है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि तीसरी लहर अभी आई भी नहीं है कि कई चैनल दावा कर रहे हैं कि यह बच्चों के लिए खतरनाक है और 70 लाख बच्चों की मौत हो सकती है। इस तरह की गैर जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग देश में डर और दहशत का माहौल बना रहे हैं। इसकी वजह से जो लोग इस महामारी की चपेट में आ रहे हैं वे कोविड से कम और दहशत से ज्यादा मौत की चपेट में जा रहे हैं।
संक्रमित लोगों का बहिष्कार संगठित अपराध
– इसी तरह से कोविड-19 संक्रमित लोगों के सामाजिक बहिष्कार को उन्होंने मानवता के खिलाफ संगठित अपराध करार दिया और कहा कि इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा समाज इंसानियत के बजाय हैवानियत का परिचय दे रहा है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कानपुर आईआईटी के सब रजिस्ट्रार भी इस महामारी की चपेट में आए थे लेकिन लोगों ने उनके घर पर नो एंट्री का बोर्ड लगाया और उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दी। हताशा में उन्होंने आत्महत्या कर ली। मिश्रा ने कहा कि इस तरह की चीजें महामारी से अधिक घातक है।

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