अभी कोरोना संक्रमण के दौरान रोगी का मनोबल कमजोर पड़ गया ,वह दहशत में जी रहा है,इसका उपाय हमारे ऋषि मुनियों ने पहले ही खोज निकाला है,आखिर कैसे मनोबल का विकास हो जानते है,

आचार्य लोकेश जैनमुनि कहते है की बल की आवश्यकता सभी को होती है। बल कई तरह का होता है। शरीर के बल से अधिक आवश्यक है मन का बल। यह दुनिया बड़ी विचित्र है, समस्याओं से आकुल व्याकुल है। असंख्य समस्याओं के बीच रहना और सुख तथा आनंद के साथ जीना मनोबल के बिना संभव नहीं हो सकता।
मूड का अच्छा रहना, मनोबल का अच्छा रहना सारा खानपान पर निर्भर करता है। जो व्यक्ति राजसी भोजन करते हैं, मिर्च-मसाले अधिक खाते हैं उनमें मनोबल की कमी होती है। सात्विक आहार संतुलित जीवन का आधार है, राजसी आहार आवेश और आवेग पैदा करता है, लेकिन तामसिक आहार तो समस्याओं का उत्पत्ति केंद्र है। यदि हम अनुपात निकालें तो यह समीकरण होगा- सात्विक आहार करने वाले व्यक्ति में साठ प्रतिशत मनोबल होता है, राजसी आहार करने वाले में तीस प्रतिशत और तामसिक आहार करने वाले में दस प्रतिशत मनोबल होगा। आहार एक सशक्त उपाय है मनोबल को बढ़ाने का। इसीलिए जितने भी आध्यात्मिक योगी हुए हैं, उन्होंने सबसे पहले आहार पर ध्यान दिया है। जन्म से ही जिनका मनोबल प्रबल नहीं है, वे आहार के माध्यम से अपने मनोबल को बढ़ा सकते हैं, उसका विकास कर सकते हैं।

संकल्प से मनोबल का विकास किया जा सकता है। मनोबल का एक नियामक तत्व है- धैर्य। मालिक ने नौकर से कहा-पानी लाओ। दो मिनट की देरी से नौकर पानी लाया। मालिक उस पर उबल पड़ा। दो क्षण तक धैर्य रखना भी भारी हो गया। धैर्य जीवन की सफलता का महानतम सूत्र है। धैर्य का विकास सात्विक आहार के बिना संभव नहीं है। धैर्य की कमी बेचैनी देती है और बेचैनी तनाव। और अगर यह हमेशा होता है तो दिमाग का हर समय तनाव में रहना हमें गुस्सा, क्रोध और अवसाद के मुहाने पर खड़ा कर देता है। धैर्य न होने पर हम बस दौड़ते रह जाते हैं। कहीं संतुष्टि नहीं होती। थोड़ा कुछ होते ही लड़खड़ा जाते हैं। लेखक जॉयस मेयर कहते हैं, ‘धैर्य इंतजार करने का नाम नहीं है। यह इंतजार के समय सही सोच बनाए रखने की योग्यता है।’अभी कोराना काल में मनोबल गिर रहा है रोगी हृदयाघात से मर रहे है, मनोबल ही वह आधार है जो हमें संतुलित जीवन की राह पर अग्रसर करता है।

मनोबल के विकास में योग या रसायन की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रसायनों के सेवन से मनोबल का विकास होता है। चरक, सुश्रुत आदि आयुर्वेद के ग्रंथों में रसायनों द्वारा मनोबल, मानसिक शक्ति के विकास के अनेक उपाय सुझाए गए हैं। शंखपुष्पी के द्वारा अमुक शक्ति का विकास होता है, ब्राह्मी के द्वारा अमुक शक्ति का विकास होता है आदि-आदि। जिस व्यक्ति में उत्तम मनोबल जाग जाता है, दूसरे शब्दों में कहा जाए तो संकल्प शक्ति का मनोबल जाग जाता है, दुःख-बहुल और समस्याओं से आक्रांत इस जगत में उसका जीवन सचमुच निर्बाध हो जाता है। कोई भी शक्ति उसे झुका नहीं सकती, दुःखी नहीं बना सकती।
सुखी बनने का शास्त्रोक्त मंत्र है- मनोबल का विकास। वही व्यक्ति इस दुनिया में सुखी बन सकता है, जिसने मनोबल को विकसित कर लिया है। जागतिक समस्याओं को कोई नहीं मिटा सकता। बड़े-बड़े राष्ट्र भी समस्याओं से घिरे रहते हैं, वे भी उनका उन्मूलन नहीं कर सकते। परंतु व्यक्ति इन समस्याओं के बीच रहता हुआ भी सुखी रह सकता है।
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डॉ पीयूष त्रिवेदी, राजस्थान विधानसभा जयपुर।
9828011871.
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