सिर्फ कोरोना से ही नहीं बल्‍कि किसी भी तरह के संक्रमण से पहले से ही बचाव किया जा सकता है और संक्रमण होने पर क‍िस तरह से आज कोरोना का इलाज संभव है। इसके बचाव में आयुर्वेद में तीन उपयोग उल्लेखित है —
1नस्‍य,
2धूपन और
3,औषधि‍।

1-नस्‍य अपनाए

डॉ त्रिवेदी ने अपने अध्ययन से एक वार्ता में बताया कि अब उन लोगों को भी कोरोना हो रहा है जो कहीं जा नहीं रहे हैं और सिर्फ घर में ही बैठे हैं, क्‍योंकि यह एयरबोर्न यानी हवा में भी और किसी न किसी सामग्री के साथ घर में भी प्रवेश कर रहा है, ऐसे में नस्‍य क्रिया का प्रयोग किया जा सकता है और यह अत्यंत सफल हो रहा है।
नस्‍य का अर्थ है नासिका या नाक में दवाई का उपयोग करना।
यह नस्य पंचकर्म का भाग है,कोरोना से बचने के लिए रोजाना अपनी नाक में सुबह-शाम तीन-तीन बूंद अणु तेल या गाय का घी डालना चाहिए। इसके प्रयोग से हमारे नेजल न्‍यूकोजा यानी झ‍िल्‍ली के बीच सुरक्षा कवच के तौर पर काम करेगा और वायरस को शरीर के अंदर नहीं जाने देगा। इसमें अगर कोरोना के हल्‍के लक्षण भी होंगे तो ठीक हो सकते हैं।

प्राणायाम का अभ्यास जरूरी

इसके साथ हमें सुबह या शाम को अनुलोम विलोम प्राणायाम करना है। यह हमारे फेफड़ों को मजबूत करेगा और दूषि‍त तत्‍वों को बाहर करेगा।

एंटी वायरल मेड‍िसिन प्रयोग करें

बहुत सारी एंटी वायरल मेड‍िसिन आयुर्वेद में हैं, जो हमें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाएगी, हमारी रोग प्रतिरोधक (इम्‍युनिटी) क्षमता बढ़ाएगी और है जो हमें कई तरह के रोगों से बचाएगी। इसमें तुलसी, पुष्‍कर मूल, पीपली, हल्‍दी, दालचीनी, वासाचूर्ण, लौंग, सितोपलादि चूर्ण शामिल हैं, जो हमारी इम्‍युनिटी को बूस्‍ट करेगी। इसके साथ ही अश्‍वगंधा और नीम चढ़ी ग‍िलोय भी बहुत प्रभावकारी औषधियां हैं, जो बहुत असर करती है। इनका चूर्ण हो सकता है, टैबलेट हो सकती है या काढ़ा बनाकर इस्‍तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए डॉक्‍टर की सलाह ली जा सकती है।

इसके साथ ही सुवर्ण सम‍ीर पन्‍नग रस, श्वास कास चिंतामणिरस, संजीवनी वटी, सुदर्शन घन वटी , स्वास कुठार रस , चंद्रा मृता रस आदि औषधि‍यां भी कई तरह से बेहद ज्‍यादा फायदेमंद और संक्रमण से बचाव करती हैं। इन्‍हें आयुर्वेद डॉक्‍टर से सलाह के बाद इस्‍तेमाल किया जा सकता है। यह प्र‍िवेंटि‍व भी है और माइल्‍ड सिम्‍प्‍टोम्‍स के लिए भी कारगर हैं।

2,धूपन विधि अपनाए,

आयुर्वेद में धूपन का भी बहुत महत्‍व है। धूपन यान‍ि धूएं का इस्‍तेमाल। डॉ अग्रवाल के मुताब‍िक धूपन न सिर्फ संक्रमण से दूर रखेगा बल्‍कि घर में कीट, पतंगों और किसी भी तरह के विषैले जानवरों से दूर रखेगा। उन्‍होंने बताया कि दशांग लेप, जटामांसी चूर्ण और तुलसी मंजरी आदि का धुआं करने से संक्रमण पूरी तरह से खत्‍म हो जाता है। जैसे हम मच्‍छरों को मारने के लिए नीम की पत्‍त‍ियों का इस्‍तेमाल करते हैं ठीक उसी तरह यह संक्रमण के लिए काम करता है।

3,आयुर्वेद औषधि ,

कोव‍िड संक्रमण के दौरान
आयुर्वेद में कोराना का गंभीर संक्रमण होने पर आधुनिक इलाज के साथ ही आयुर्वेद में कई तरह की सुवर्ण औषधियां उपलब्‍ध हैं, जिन्‍हें आयुर्वेद चिकित्‍सक की सलाह के बाद ली जा सकती है।

पोस्‍ट कोविड रोगी को बनाएं ताकतवर,

कोरोना संक्रमण के बाद लोगों में इम्‍युनिटी कम होना, कमजोरी आना और थकान बहुत आम है। इन्‍हें दूर करने के लिए अमृता अरिष्टऔर द्राक्षासव ले सकते हैं। यह कमजोरी और थकान दूर करता है। इसके साथ ही अगस्‍त्‍य रसायन और चित्रक हरीतकी अवलेह भी ले सकते हैं। यह दोनों चटनी की तरह होती है।

लाइफ स्‍टाइल पर फोकस करें,

किसी भी स्‍थि‍ति में स्‍ट्रेस यानि‍ तनाव नहीं लेना है। अपनी तासीर के हिसाब से कुनकुना पानी पीएं। फ्रीज में रखी सामग्री का इस्‍तेमाल नहीं करना है। सुबह- शाम हल्‍का और सुपाच्‍य भोजन करना है। इसके साथ ही पेट को हर हाल में साफ रखना है।खुली हवा में योग व्यायाम व हल्की कसरत करनी है,पर्याप्त नींद लेनी है।सकारात्मक सोच रखनी है,मास्क लगाना,हाथ धोना,घर में परिवार जनों से दूरी रखनी है।।

डॉ पीयूष त्रिवेदी
आयुर्वेदाचार्य , एम डी ,पी एच डी।
चिकित्साधिकारी राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय राजस्थान विधानसभा,जयपुर।
9828011871

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