दिल्ली हाई कोर्ट ने शनिवार को राजधानी में ऑक्सीजन की कमी के मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वो दिल्ली को उसके हिस्से की 490 मीट्रिक टन ऑक्सीजन कैसे भी उपलब्ध कराए.

जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की डिविज़न बेंच का यह आदेश कई अस्पतालों की ऑक्सीजन सप्लाई में कमी की शिकायत के बाद आया है.

कोर्ट ने साथ ही केंद्र को चेतावनी दी कि अगर दिल्ली को आज ही उसके हिस्से की ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हुई तो उसके ख़िलाफ़ अवमानना का मामला भी चलाया जा सकता है.

कोर्ट ने कहा,“पानी सिर के ऊपर जा चुका है. अब हमें काम से मतलब है. आप (केंद्र) अभी सब व्यवस्था करिए.”

कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसके आदेश का पालन नहीं हुआ तो अगली सुनवाई पर संबंधित प्रशासन को कोर्ट में पेश होना होगा.

कोर्ट ने कहा कि दिल्ली कोई औद्योगिक राज्य नहीं है और उसके पास क्रायोजेनिक टैंकर्स नहीं हैं.

कोर्ट ने बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण 8 मरीज़ों के मारे जाने का संज्ञान लेते हुए कहा, “दिल्ली में मरते लोगों को देखकर क्या हम अपनी आंखें बंद कर लें.”

कोर्ट ने माना कि दिल्ली का 20 अप्रैल को ऑक्सीजन का कोटा बढ़ाया गया था और तब से लेकर अब तक किसी भी दिन पूरी सप्लाई उसे नहीं हुई है.

इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी.

वहीं, ऑक्सीजन की समस्या पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को कहा कि ऑक्सीजन की भारी कमी है और कई अस्पतालों ने इमरजेंसी कॉल दी है.

उन्होंने कहा, “हमने कोर्ट से कहा है और केंद्र को भी लिखा है कि दिल्ली को 976 टन रोज़ाना ऑक्सीजन की ज़रूरत है लेकिन हमें 490 टन ऑक्सीजन ही दी गई है और कल हमें सिर्फ़ 312 टन ऑक्सीजन मिली थी. आख़िर ऐसे कैसे चलेगा?”

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि वो नीति-निर्माताओं से हाथ जोड़कर अपील करते हैं कि वे दिल्ली को ऑक्सीजन दें.

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