कोटा 12 अप्रैल । ऐसे वक्त में जब पूरा देश और दुनिया कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रही है और सरकारें आमजन से अपील कर रही है कि थोड़े भी लक्षण दिखाई देने पर अपना टेस्ट अवश्य करवाएं ताकि दूसरों को संक्रमित होने से बचाया जा सके। ऐसी ही नैतिकता का परिचय दिया कोटा के एक कोचिंग संस्थान में कार्यरत फैकल्टी धीरज टाक ने, जब गत शनिवार को उन्हें रात्रि में बुखार आया तो बिना किसी संकोच के उन्होंने रविवार सुबह महावीर नगर कि सरकारी डिस्पेंसरी में जाकर आरटी पीसीआर के लिए अपना सैंपल दिया और अपने आप को शनिवार की रात से ही आइसोलेशन में रखा।

  • ऊपर राजस्थान हेल्थ विभाग द्वारा जारी नेगेटिव रिपोर्ट

राजस्थान हेल्थ विभाग द्वारा जारी पहला sms 3.09 pm पर व दूसरा 6.08 pm पर sms गोले में

रविवार का पूरा दिन और सोमवार का पूरा आधा दिन क्वारंटाइन रहने के बाद 3:00 बजे विभाग से प्राप्त हुए s.m.s. के आधार पर उनकी रिपोर्ट नकारात्मक आई और वह अपने परिवार के साथ सामान्य हो गए।

  • ऊपर राजस्थान हेल्थ विभाग द्वारा जारी पॉजिटिव रिपोर्ट

लेकिन हद तो तब हो गई जब 3 घंटे बाद शाम 6 बजे स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जारी रिपोर्ट में उन्हें पॉजिटिव घोषित किया गया। इस दौरान उनके द्वारा रखा गया 40 घंटे का सामाजिक व्रत बिल्कुल बेकार हो गया तथा उनके परिवार को भी कोविड हो जाने का खतरा बढ़ गया जिसमें उनकी 1 साल की बेटी भी है। यदि ऐसे में उनके परिवार के किसी भी सदस्य को यह संक्रमण होता है जिसके कारण जो भी परिवार का मानसिक शारीरिक वह आर्थिक शोषण होता है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

गोरखधंधा इसीलिए कह रहे हैं क्योंकि अब इनके पास प्राइवेट अस्पताल में जाकर उन्हें जांच करवाने के सिवाय कोई चारा नहीं बचा। तो सवाल यह उठता है कि कहीं इस प्रकार की सरकारी मिलीभगत से कोविड टेस्ट करने वाले प्राइवेट अस्पतालों की चांदी तो नहीं कट रही है?

धीरज टाक की कलम से

Leave a Reply