क्या मोतियाबिन्द बच्चों में हो सकता है?*
मोतियाबिन्द छोटे बच्चों में जन्म के बाद हो सकता है। इसे कन्जेनाईटल कैटेरेक्ट कहते है। कुछ बच्चों में चोट लगने के कारण आँख में मोतियाबिन्द हो जाता है, जिसे ट्रोमेटिक कैटेरेक्ट कहा जाता है। 

क्या है छोटे बच्चों में मोतियाबिन्द के कारण?
छोटे बच्चों में मोतियाबिन्द गर्भावस्था के दौरान होने वाले इन्फेक्शन (रूबेला) अथवा अन्य वंशानुगत कारणों से हो सकता है। 

क्या है बच्चों में मोतियाबिन्द के लक्षण?
बच्चों में मोतियाबिन्द पक जाने पर पारदर्शी पुतली के बीचों-बींच सफेद निशान दिखाई दे सकता है। बच्चों में मोतियाबिन्द होने पर उन्हें अस्पष्ट दिखाई देता है। मोतियाबिन्द से पीड़ित छोटे बच्चों में खिलौंनों एवं टी.वी. को पास से देखना, प्रकाश के प्रति संवेदनशील होना एवं चलते-चलते गिर जाना आदि अन्य लक्षण भी देखे जा सकते है। 

क्या है बच्चों में मोतियाबिन्द उपचार?
बच्चों में मोतियाबिन्द का एकमात्र उपचार मोतियाबिन्द आपरेशन एवं लैंस प्रत्यारोपण नामक विधि द्वारा किया जाता है। छोटे बच्चों में पोस्टीरियर केपसुलोटोमी एवं एन्टीरियर विट्रेक्ट्राॅमी नामक आपरेशन से दुबारा लैंस के पीछे वाली झिल्ली मोटी होने की सम्भावना बहुत कम हो जाती है। बच्चों में मोतियाबिन्द का आपरेशन बेहोशी में किया जाता है एवं आपरेशन के दौरान आँख में लगाये गये चीरों को बन्द करने के लिए बहुत बारीक टांके लगाये जाते है। 

क्या है एक्जामिनेशन अण्डर एनेस्थिसिया (ई.यू.ए)?
छोटे बच्चों में मोतियाबिन्द आपरेशन के पहले बेहोशी में आँख की सम्पूर्ण एवं विस्तृत जाँच मशीनों द्वारा की जाती है।
इस प्रक्रिया के दौरान मोतियाबिन्द की स्थिति, आँख में प्रत्यारोपित होने वाले लैंस का नम्बर, आँख के पर्दे की जाँच एवं आँख के प्रेशर आदि की जाँच की जाती है। 
कब होता है बच्चों में मोतियाबिन्द आपरेशन?
छोटे बच्चों में सफेद मोतियाबिन्द का पता चलने पर अथवा मोतियाबिन्द का 3 मिमी. से अधिक होने पर आपरेशन जल्दी ही करवा लेना चाहिए। यदि एक आँख मे मोतियाबिन्द है तो 4 सप्ताह की आयु में और यदि दोनों आँख में मोतियाबिन्द हैे तो 6 सप्ताह की आयु में आपरेशन किया जा सकता है। लम्बे समय तक मोतियाबिन्द का आपरेशन न करवाने पर इन बच्चों में एम्बलायोपिया नामक बीमारी हो सकती है जिसके अन्तर्गत आँख सुस्त हो जाती है। 

कैसे निकाला जाता है कृत्रिम लैंस का नम्बर ?
छोटे बच्चों में एक्जामिनेशन अण्डर एनेस्थिसिया (ई.यू.ए) के दौरान (आॅपरेशन के पहले) आँख की बायोमेट्री करते है, जिसके अन्तर्गत ए-स्केन नामक मशीन द्वारा आँख की लम्बाई की जाँच की जाती है। हैंड हेल्ड केरोटोमीटर द्वारा आँख की र्काॅिर्नया का पावर निकाला जाता है, जिसे के-रिडिंग कहते है। के-रिडिंग एवं आँख की लम्बाई के द्वारा इन छोटे बच्चों की आँख में प्रत्यारोपित किये जाने वाला लैंस का नम्बर निकाला जाता है। 
क्या लैंस प्रत्यारोपण के बाद भी चश्मा लगाने की आवश्यकता होगी?:
कृत्रिम लैंस प्रत्यारोपण के बाद बच्चों में मोतियाबिन्द आपरेशन एवं मोनोफोकल लैंस प्रत्यारोपण के बाद नजदीक एवं दूर का चश्मा लगाना आवश्यक होता है, जिसका नम्बर आयु बढ़ने पर बदलता रहता है।

कैसे होता है लैंस का चुनाव?
बच्चों में मोतियाबिन्द आपरेशन के बाद सामान्यतः मोनोफोकल लैंस (जैसे – एल्कोन एक्रीसोफ सिंगल-पीस, एल्कोन एक्रीसोफ आई क्यू, ए. एम. ओ. सेन्सार-1, ए. एम. ओ. टेक्निस-1 आदि) प्रत्यारोपित किये जाते है। 10 वर्ष से अधिक आयु वाले बच्चों में मोतियाबिन्द आॅपरेशन के दौरान मल्टीफोकल लैंस प्रत्यारोपित किये जा सकते है, जिससे दूर व पास का स्पष्ट दिखाई देता है एवं चश्में पर निर्भरता लगभग समाप्त हो जाती है। तिरछा नम्बर (काॅर्नियल एस्टीगमेटिज्म) होने पर टोरिक लैंस अथवा मल्टीफोकल टोरिक लैंस का प्रत्यारोपण चश्में का तिरछा नम्बर हटाने में सहायक होता है। 

मोतियाबिन्द आपरेशन के बाद कब तक दिखाना पड़ेगा?
छोटे बच्चों मोतियाबिन्द आपरेशन के बाद वर्ष में दो बार ई.यू.ए.नामक विधि द्वारा बेहोशी में जाँच की जाती है एवं आवश्यकता पड़ने पर आपरेशन के दौरान लगाये गये टांकों को निकाला जाता है। साथ ही साथ आँख के प्रेशर एवं पर्दे की जांच भी आपरेशन के बाद समय-समय पर करवाना आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त छोटे बच्चों में आपरेशन के बाद आँख की सुस्ती (एम्बलायोपिया) के उपचार हेतु आकुलजन थैरेपी की आवश्यकता भी पड़ सकती है, जिसके लिए वर्ष में दो बार नियमित रूप से बच्चें की आँख का परीक्षण करवाना जरूरी होता है।

डॉ विदुषी एवम् डॉ सुरेश पाण्डेय, सुवि नेत्र चिकित्सालय, कोटा

Leave a Reply