व्हाट्सएप ने हम भारतीयों के निजी जीवन के डाटा टटोलने की साजिश की है। सरकार के संज्ञान में भी यह बात आ गई है। यूजर्स इसके खतरे इंगित कर रहे हैं। व्हाट्सएप की यह नीति भारत की संप्रभुता के लिए भी खतरा है । राजनीतिक दलों को भले ही अपने देश के नागरिकों के बारे में व्यापक जानकारियां प्राप्त करना फायदे का सौदा लग सकता है।लेकिन आम जीवन में यह अफरा-तफरी पैदा कर देगा । प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में कई तरह की निजी गोपनीयता होती हैं, जिनका भेद खुलना उनके जीवन को बर्बाद कर सकता है। व्हाट्सएप व्यापारिक नफे नुकसान की आड़ लेकर मानवता विरोधी कृत्य करना चाहता है। उसकी इस साजिश को नाकाम करना होगा। यह तभी संभव है जब हम इसकी टक्कर के दूसरे विकल्प प्रस्तुत करें। नागरिकों के निजी जीवन में ताकझांक करने की व्हाट्सएप की नई नीति शर्मनाक क्रत्य है। विश्व के अनेक देशों में यह एप पहले से ही प्रतिबंधित है। लोकेशन की जानकारी यूजर के जीवन को ही संकट में डाल सकती है।अपराधी लोग लोकेशन लेकर यूजर पर हमले और हत्या जैसी वारदातों को आसानी से अंजाम दे सकते हैं। क्या इस पर भी सोचा गया है ? व्हाट्सएप की सबसे बड़ी तानाशाही यह यह है कि उसने अपनी मानवता विरोधी रीति नीति में असहमति का कोई विकल्प नहीं दिया है। वह कंपनी कितने भी दावे करे, पर्सनल डाटा जुटाकर उन्हें बेचेगी अथवा दुरुपयोग करेगी ही। क्योंकि जिनकी इतनी दूषित भावना है उनसे सभ्य और ईमानदार आचरण की उम्मीद नहीं की जा सकती। हमारे तो धर्म शास्त्रों में सीख दी गई है कि कुछ ऐसे मामले या बातें होती है जिन्हें पत्नी अपने पति को भी ना बताए, ऐसा ही पुरुषों के बारे में भी है। इसी प्रकार असत्य बोलने में भी झूठ बोलने का पाप नहीं लगता यदि किसी की प्राण रक्षा के लिए बोला गया हो और यह विदेशी व्हाट्सएप अपनी नंगाई पर उतारू है। इनको प्रतिबंधित किया जाए, बहिष्कार किया जाए या सबक सिखाने के लिए इससे संबंधित अन्य व्यापारिक कंपनियों को भी काली सूची में डाल दिया जाना चाहिए। फेसबुक, इंस्टाग्राम, पेमेंट्सटेक्नोलाजीज,ओनावो,क्राउड टेंगल और व्हाट्सएप एक ही कंपनी की है। हमारे देश में इनका बड़ा कारोबार है। व्हाट्सएप की नई नीति द्रोपदी के चीरहरण का प्रयास जैसी है। आपकी बातचीत रिकॉर्ड कर ली जाएगी। लोकेशन तो 24 घंटे उनका सर्वर दर्ज करता रहेगा। सरकार को नियम सख्त करने चाहिए। डाटा लीक करने के प्रावधानों अथवा शर्तों को सख्ती से अमान्य कर देना चाहिए और अपने देश की नीतियों के अनुरूप चलने को बाध्य किया जाना चाहिए।जिस तरह टिकटाक को बैन किया गया उसी प्रकार तुरंत ही इसको भी बैन कर देना चाहिए। व्हाट्सएप जैसे अन्य एप्स को जल्द से जल्द मैदान में उतारा जाए। अपनी निजता बारे में भी सोचें। हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठें। आधार कार्ड पर सुप्रीम कोर्ट तक दस्तक देने वाले नेता भी इस मामले में अपना मौन तोड़ें।उनके होंठ क्यों सिले पड़े हैं?

  • गयाप्रसाद बंसल

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