अशोक गहलोत सरकार ने नगर निगम व निकायों और जिला परिषद व पंचायत समितियों के चुनाव की वैतरणी पार करने के लिये इस बार नई रणनीति बनाई है.
जयपुर. प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार नगर निगम व निकायों और जिला परिषद व पंचायत समितियों के चुनाव की तैयारियों जुट गई है. इसके लिये प्रभारी मंत्री से लेकर प्रभारी सचिवों को बदलकर लोक कल्याकारी कार्यों में तेजी लाने के प्रयास किये जा रहे हैं. माना जा रहा है कि गहलोत सरकार विकास कार्यों की जल्द से जल्द स्पीड बढ़ाकर उसका चुनावी फायदा लेने की जुगत में है ताकि पिछले दिनों हुये सियासी घटनाक्रम की गड़बड़ियों को इनके जरिये पाटा जा सके.
बताया जा रहा है कि गहलोत सरकार को अंदेशा है कि फिलहाल चुनावी समीकरण सरकार के पक्ष में कमजोर हैं. इसीलिये सरकार कोरोना की आड़ लेकर चुनावों से बचना चाहती थी, लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद इसकी संभावना कम हो गई है. क्योंकि हाल ही जब सरकार वापस से 6 नगर निगमों के चुनाव टलवाने के फिर हाईकोर्ट गई थी. लेकिन कोर्ट ने यह कहकर सरकार की याचिका खारिज कर थी कि जब बिहार में चुनाव हो हो रहे हैं और राजस्थान में पंचायत चुनाव चल रहे है तो निगमों के चुनाव होने में क्या दिक्कत है. लिहाजा निगमों के चुनाव तय समय पर कराये जायें.
हालांकि सरकार की ओर से हाई कोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिये जाने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अगर वहां से भी राहत नहीं मिली तो चुनाव होना तय है. ऐसे सरकार ने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी. अब सरकार की रणनीति है विकास के कार्यों की स्पीड बढ़ाकर इसके जरिये जनमानस पर पकड़ मजबूत की जाये. इसे अमली जामा पहनाने के लिये व्यापक स्तर पर फेरबदल किया जा रहा है.
मंत्रियों के पसंदीदा अफसरों को दिया जिम्मा
गहलोत सरकार ने मंत्री और अफसरों में बेहतर तालमेल की मनसा से हाल ही में 13 जिलों के प्रभारी सचिव बदल भी दिए हैं. दरअसल, सरकार प्रभारी मंत्री एवं प्रभारी सचिव के बीच बेहतर तालमेल कायम रखना चाहती है. ताकि सरकार की लोक कल्याणकारी योजना और बजट घोषणाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन हो सकें. प्रभारी मंत्रियों के पसंदीदा अफसरों को उनके जिले में बतौर प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है. अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर से लेकर संभागीय आयुक्त तक के अफसरों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है.
हाल ही में बदले थे प्रभारी मंत्री
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सुशासन के एजेंडे को अंतिम पायदान तक पहुंचाने के लिए हाल ही में जिलों के प्रभारी मंत्री बदल दिए थे. मुख्यमंत्री प्रभारी मंत्रियों के मिले फीडबैक से नाखुश बताए जा रहे थे. संभवत इसी के चलते प्रभारी मंत्री बदले गए थे. अब मुख्यमंत्री ने बदले गए प्रभारी मंत्रियों की पसंदीदा अफसरों को जिला प्रभारी सचिव नियुक्त किया है. मुख्यमंत्री ने पसंदीदा अफसर देकर प्रभारी मंत्रियों की जिम्मेदारी तय कर दी है. मुख्यमंत्री लोक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आमजन तक नहीं पहुंच पाने पर अब मंत्रियों और प्रभारी सचिव के बहाने नहीं सुनेंगे.

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