जयपुर, 02 सितम्बर । मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार कोरोना के उपचार एवं संक्रमण की रोकथाम के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रख रही है। जिला प्रशासन, चिकित्सकों एवं अन्य अधिकारियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि लापरवाही के कारण एक भी व्यक्ति की जान नहीं जाए। उन्होंने कहा कि जिलों में अधिकारी पूरे तालमेल के साथ कोविड़ प्रबंधन को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। इसमें किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं होगी।

गहलोत बुधवार को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कांफ्रेंस के जरिए संभागीय आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, जिला कलक्टरों-पुलिस अधीक्षकों, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्यों एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के साथ कोरोना नियंत्रण की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने जिलों में कोरोना संक्रमण की स्थिति, रोकथाम, उपचार, दवाओं की उपलब्धता, कोविड केयर सेंटरों की स्थिति, प्लाज्मा थैरेपी एवं जागरूकता अभियान को लेकर गहन समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना देखभाल केन्द्रों में भर्ती मरीजों के उपचार एवं उनसे संबंधित जानकारी परिजनों को आसानी से मिल सके। साथ ही उपचार एवं अन्य व्यवस्थाओं को लेकर परिजनों को भटकना नहीं पड़े। इसके लिए हर सेंटर पर अनिवार्य रूप से हैल्प डेस्क की व्यवस्था हो।
गहलोत ने कहा कि प्लाज्मा थैरेपी से गंभीर रोगियों का जीवन बचाने में मदद मिल रही है। इसके बेहतर परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि रक्तदान को लेकर आमजन में जो जागरूकता आई है उसी तरह स्वस्थ हुए कोविड रोगियों को प्लाज्मा दान करने के लिए प्रेरित करें। इसके लिए पूरे प्रदेश में अभियान चलाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश में कोरोना का बेहतर प्रबंधन हो रहा है। इसके चलते मृत्यु दर विगत दो माह से एक प्रतिशत से भी कम रही है। लेकिन संक्रमितों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में भावी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऑक्सीजन बैड एवं आईसीयू बैड की संख्या बढ़ाने के काम को प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए निजी अस्पतालों का भी सहयोग लें।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में एक सीएचसी को मॉडल के रूप में विकसित करने के कार्य को प्राथमिकता दें।

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