बेंगलूरु. सलोत जैन आराधना भवन में आचार्य देवेंद्रसागर ने कहा कि हमारे जीवन के उद्देश्य तय होने जरूरी हैं। जीवन में उतार-चढ़ाव, हर्ष-विषाद, सुख-दुख स्वाभाविक है। जब अपने जीवन के प्रति हमारा नजरिया सकारात्मक एवं सर्तक होता है, तो हम किसी भी प्रकार के उतार-चढ़ाव से घबराते नहीं हैं और न ही लक्ष्य से भटकते हैं।

जीवन में आने वाले परिवर्तनों से घबराएं नहीं, बल्कि उन्हें स्वीकारें। जब आपके अंदर किसी काम को लेकर जुनून होता है तो कभी-कभी वह जुनून ही जीवन के उद्देश्य में तब्दील होने लगता है। जीवन में अनेक पड़ाव आते हैं, जो अलग-अलग अनुभव देते हैं।

इसलिए जब कभी एक बेहद तनाव वाले पड़ाव में लगे कि किसी तरीके का बदलाव आपके जीवन को सरल और खुशनुमा बना सकता है, तो उसे आप अपना उद्देश्य बना लीजिए। जिंदगी है, तो चुनौतियां होंगी ही। कुछ चुनौतियों से आप आसानी से पार पा लेते हैं, पर कुछ आपसे खुद को बदलने की मांग करती हैं। कामयाबी इस पर निर्भर करती है कि आप कितने बेहतर ढंग से खुद को बदल पाते हैं।

आचार्य ने कहा कि हममें से ज्यादातर को तुरंत नतीजों पर पहुंचने की जल्दबाजी रहती है। मंजिल ढूंढने में जरा देरी हुई नहीं कि हम रास्ते को ही गलत ठहरा देते हैं। अपना रास्ता बदल देते हैं। इससे उलझनें ही बढ़ती हैं। जरूरी है कि हम सिर्फ मंजिल नहीं, पूरी यात्रा पर ध्यान दें। यह समझें कि नाम, पैसा व कामयाबी एक दिन में नहीं मिलती। हमें लगातार खुद पर काम करना पड़ता है।

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