गायक मुकेश की 27 अगस्त को 44वीं पुण्यतिथि है। संगीत के दीवानों के लिए मुकेश जहां एक तोहफा थे, वहीं गायकी की दुनिया में वह एक नायाब हीरा साबित हुए। हालांकि मुकेश कभी भी सिंगर नहीं बनना चाहते थे। वह अभिनेता बनने का सपना लिए मुंबई आए थे। 22 जुलाई, 1923 को लुधियाना में जन्मे मुकेश का पूरा नाम मुकेश चंद्र माथुर था। मुकेश की बड़ी बहन संगीत की शिक्षा लेती थी और मुकेश बड़े ध्यान से उन्हें सुना करते थे। बड़ी बहन को गाते देखकर मुकेश के मन में संगीत के प्रति गहरी रुचि पैदा होने लगी। इसके बाद मुकेश ने मोतीलाल से संगीत की पारपंरिक शिक्षा लेनी शुरू कर दी। संगीत में रुचि होने के बावजूद मुकेश की ख्वाहिश हिन्दी फिल्मों में बतौर अभिनेता काम करने की थी। मुकेश ने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और नौकरी करने लगे, लेकिन उनका मन बार-बार बड़े पर्दे की तरफ आकर्षित हो रहा था। अतः वह अभिनेता बनने का सपना लिए काम छोड़कर मुंबई आ गए। यहां उन्होंने फिल्मों मे अभिनय करना शुरू किया, लेकिन इसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिली। उसके बाद मुकेश ने गायन के क्षेत्र में रुख किया।
मुकेश ने 1940 से 1976 के बीच सैकड़ों फिल्मों के लिए गीत गाए जो हिट रहे। इस क्षेत्र में उन्हें अपार सफलता और दर्शकों का बेशुमार प्यार मिला। मुकेश को 1941 में रिलीज हुई फिल्म ‘निर्दोष’ में बतौर गायक पहला ब्रेक मिला। उस जमाने के मशहूर गायक-अभिनेता केएल सहगल ने जब मुकेश की आवाज सुनी तो उन्हें मुकेश की आवाज बहुत पसंद आई। 40 के दशक में मुकेश का अपना पार्श्व गायन शैली थी। नौशाद के साथ उनकी जुगलबंदी एक के बाद एक सुपरहिट गाने दे रही थी। उस दौर में मुकेश की आवाज में सबसे ज्यादा गीत दिलीप कुमार पर फिल्माएं गए। 50 के दशक में मुकेश को एक नई पहचान मिली, जब उन्हें राजकपूर की आवाज कहा जाने लगा।मुकेश ने राजकपूर की कई फिल्मों में गीत गाए जिसमें मेरा जूता है जापानी (आवारा), किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार (अंदाज), दोस्त दोस्त ना रहा (संगम), जाने कहां गये वो दिन (मेरा नाम जोकर) जैसे कई मशहूर गीत गए, जो आज भी दर्शकों की जुबान पर है। मुकेश को कई पुरस्कारों  से सम्मानित किया गया था जिसमें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार शामिल है। मुकेश को चार बार फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मुकेश ने अपने करियर का आखिरी गाना राज कपूर की फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ के लिए गाया था, लेकिन इस फिल्म की रिलीज से पहले 27 अगस्त 1976 को मुकेश का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। अपने गीतों के बदौलत मुकेश आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है।

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