जयपुर, 24 अगस्त। प्रदेश में मानसून सक्रिय है। मानसून की बारिश के असर से माही डैम के सभी 16 तो कालीसिंध बांध के 10 गेट खोलकर पानी की निकासी की जा रही है। तीन दिनों से उदयपुर और कोटा संभाग में बादल जमकर बरस रहे हैं। बारिश से प्रदेश के 742 बांधों में से 38 बांध ओवरफ्लो हो चुके हैं, लेकिन 297 अभी खाली हैं। अलवर में बीती रात एनईबी इलाके के कैमाला गांव में एक निर्माणाधीन मकान की छत गिर गई। मलबे और भारी-भरकम लैंटर के नीचे दबने से पिता, दो बेटियों और एक महीने के बेटे की मौत हो गई। जबकि बच्चों की मां गंभीर घायल है। प्रदेश के सभी जिलों में मेघ भाद्रपद मास में पूरी तरह से मेहरबान हैं। पाली शहर में सोमवार सवेरे से बारिश का दौर जारी है। राजधानी जयपुर में रविवार को रिमझिम बारिश के बीच बादलों ने डेरा डाले रखा। इस दौरान चल रहे ठंडी बयार से मौसम सुहावना बना रहा। देर रात से लेकर सोमवार सुबह तक फुहारों ने मौसम को शानदार बना दिया। बारिश की हल्की बूंदाबांदी से दिन की शुरुआत हुई। प्रदेश के बांसवाड़ा जिले में बारिश ने कहर बरपाया है। पानी की भारी आवक के बाद यहां स्थित माही डैम के रविवार को सभी 16 गेट खोले जा चुके हैं। बीते 24 घंटे में जिले के भूंगड़ा में 17, घाटोल में 14 और बांसवाड़ा शहर में 10 इंच बारिश हुई। उदयपुर शहर में रविवार को करीब दो घंटे में 135 मिलीमीटर पानी बरसा। झालावाड़ जिले के डग क्षेत्र में 7 इंच, रायपुर में 4 इंच से अधिक, बकानी में 2 इंच, गंगधार में 4 इंच, सुनेल में 4 इंच, खानपुर में ढाई इंच, पचपहाड़ और पिड़ावा में 3-3 इंच बारिश दर्ज की गई। बारिश के चलते कालीसिंध बांध के 10 गेट खोलने पड़े। कालीसिंध बांध से 1 लाख 15 हजार 721 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। राजगढ़ बांध के सोमवार सुबह 3 गेट खोले गए हैं। क्षेत्र के गुराडिय़ा, गागरीन, रेवा, कालीखाड़ बांध ओवरफ्लो हो गए। प्रदेश में सक्रिय मानसून अब पश्चिमी राजस्थान पर मेहरबान होने को तैयार है। कम हवा का एक दबाव क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान की तरफ शिफ्ट हो रहा है। इस सिस्टम के अगले तीन दिन तक पश्चिमी राजस्थान में सक्रिय रहने की संभावना है। गहरे निम्न दबाव का उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश पर बना हुआ था। अब यह सिस्टम पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ते हुए अगले दो दिनों के दौरान पश्चिमी राजस्थान को प्रभावित करेगा। इस सिस्टम के पास एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी बना हुआ है। मानसून की अक्षीय रेखा फिर से दक्षिणवर्ती बनी हुई है। इस समय यह जैसलमेर, भीलवाड़ा, सीधी, डाल्टनगंज, जमशेदपुर और दिघा होते हुए बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र तक बनी हुई है।

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