जोधपुर, 24 अगस्त । नागौर जिले के खिंवसर में चूना भट्टा चलाने वाले एक शख्स ने सबइंस्पेक्टर के नाम से पुलिस की फर्जी आईडी बना ली। पुलिस के चालान व टोल नाकों पर बचने के लिए इसका दुरूपयोग होता रहा। आखिरकार कारस्तानी लंबे समय नहीं चली और उसका मुनीम मंडोर पुलिस के हत्थे नाका नंबर 1 पर पकड़ा गया। पुलिस ने बिना नंबरी कार व आईडी को जब्त करने के साथ इसमें गहन अनुसंधान आरंभ किया है। इसमें किसी गिरोह का हाथ हो सकता है। फिलहाल पुलिस तस्दीक में जुटी है। मंडोर थानाधिकारी दिलीप खदाव ने बताया कि रविवार रात को पुलिस की तरफ से नाकाबंदी की गई। तब नाका नंबर 1 पर एक बिना नंबरी कार को रूकवाया गया। तब उसमें सवार व्यक्ति ने खुद को पुलिस का परिचित होना बताया और आईडी दिखाई। उसके पास पुलिस के एक सबइंसपेक्टर हरिश चौधरी की आईडी मिली। पकड़ा गया व्यक्ति जैतारण तहसील के गरनिया हाल देवरिया निवासी अशोक गिरी पुत्र भीखू गिरी निकला। उससे पूछताछ आरंभ की गई तो पता लगा कि वह नागौर जिले के खिंवसर में रहने वाले किसी हरिश चौधरी के चूने भट्टे पर कार्य करता है और मुनीम है। उसके पास मिली पुलिस की फर्जी आईडी के बारे में पूछा गया तो वह गोलमोल जवाब देने लगा। यह आईडी भरतपुर रेंज से जारी होना बताया गया। फिर उससे पूछा गया कि हरिश चौधरी कहां पर पोस्टेड है तो बताया कि वह आबूरोड सदर थाने में है। बाद में बताया कि वह कोटा में है। इस तरह पकड़ा गया मुनीम अशोक गिरी पुलिस को टालमटोल जवाब देता रहा। थानाधिकारी खदाव ने बताया कि उसके पास मिली पुलिस की फर्जी आईडी सबइंस्पेक्टर हरिश चौधरी नाम से बनी है। जबकि वह तो उसका सेठ है। इस हरिश चौधरी ने यह आईडी कब और किस तरह बनाई इसकी जांच की जा रही है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि वह कभी खुद को 2016 बैच का बता रहा था तो कभी 2013 बैच का। पुलिस ने अशोक गिरी को गिरफ्तार कर गहन पूछताछ आरंभ करने के साथ चूना भट्टा व्यवसायी के बारे में पड़ताल आरंभ कर दी है।

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