कोरोना की जांच रिपोर्ट पर उठे सवाल,किसे सही माना जाए
कोटा, 24 अगस्त। कोरोना संक्रमण का कोटा में एक ऐसा मामला सामने आया है, कि एक ही व्यक्ति की दो जांच एक ही दिन हुई और उन दोनों जांच में एक जांच में पॉजिटिव और दूसरी जांच में नेगेटिव रिपोर्ट आई ।

मामले के अनुसार कोटा में एक महिला का ऐसा ही अजीबोगरीब और चौंकाने वाला केस सामने आया है, जिसमें उक्त महिला के एक ही दिन में सुबह और शाम अलग-अलग विभागों द्वारा लिए गए सेम्पल सुबह की जांच में पॉजीटिव और शाम की जांच में निगेटिव आ गए ।
जानकारी के अनुसार बोरखेड़ा निवासी श्राीमती अपूर्वा गौतम के पति श्योपुर में कोरोना पॉजीटिव निकले, जिसके बाद महिला को भी 15-16 अगस्त को हल्का बुखार आया। जिसके बाद 17 अगस्त की सुबह महिला स्वयं अपने परिजनों के साथ दादाबाड़ी डिस्पेंसरी पहुंची और वहां कोरोना की जांच करवाई। उधर सीएमएचओ कार्यालय की टीम भी उसी दिन 17 अगस्त की शाम को ही उनके घर पहुंची और उक्त महिला समेत पूरे परिवारजनों के सेम्पल लिए। जिसके बाद 19 अगस्त की शाम को सीएमएचओ कार्यालय की टीम द्वारा लिए गए सभी सेम्पल निगेटिव आई। सेम्पल के निगेटिव आने से महिला व परिवारजनों ने राहत की सांस ली। लेकिन दादाबाड़ी डिस्पेंसरी द्वारा लिये गए कोरोना सेम्पल की जांच रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद से ही महिला व परिजन परेशान और चिंतित हो गए। बाद में दूसरे दिन 19 अगस्त की शाम को दूसरी जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद राहत की सांस ली।
महिला व उनके परिजनों को 17 अगस्त की सुबह दादाबाड़ी डिस्पेंसरी द्वारा लिए गए सेम्पल की पॉजीटिव जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग द्वारा होम क्वारंटीन कर दिया गया। महिला के भाई का कहना है कि जब एक ही दिन में दो जांचों की अलग-अलग रिपोर्ट की जानकारी विभाग को दी तो विभाग ने यह कहकर बात को टाल दिया कि पहली पॉजीटिव रिपोर्ट के आधार पर ही उन्हें पॉजीटिव माना जाएगा। लेकिन महिला के परिजनों का कहना है कि जिस दिन जांच की गई उस दिन से आजतक महिला को ना तो बुखार है ना ही खांसी-जुकाम या फिर कोई ओर लक्षण फिर आखिर क्या माना जाए।
वहीं इस मामले में भाजपा नेता गुड्डू मरचूनिया ने उक्त महिला की सुबह की जांच पॉजीटिव और शाम की जांच निगेटिव आने के बाद जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग दोनों की जांच रिपोर्ट पर सवालों के घेरे में आ गई है। गुड्डू मरचूनिया ने कहा कि इस तरह से तो यह कहना गलत नहीं होगा कि यदि किसी व्यक्ति की सुबह कोरोना की जांच रिपोर्ट पॉजीटिव आ जाए तो उसे शाम को फिर से अपनी जांच कराने के बाद ही अपनी रिपोर्ट को मानना चाहिए। यदि दोनों रिपोर्ट में वो पॉजीटिव या निगेटिव आ जाए तो उसी आधार पर उसे बीमार है या नहीं इसकी पहचान करनी चाहिए। उन्होंने जिला कलेक्टर से इस विषय को गंभीरता से लेते हुए पूरी स्थिति को स्पष्ट करने की मांग की है। गुड्डू मरचूनिया ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के कोरोना के कोई लक्षण ही नही है और यदि सेम्पल लिये जाने पर वो पॉजीटिव पाया जाता है तो या तो उसकी फिर से उसी दिन जांच कराई जाए या फिर उसे निगेटिव माना जाए, ताकि वो व्यक्ति और उसका परिवार परेशान या चिंतित ना हो। गुड्डू मरचूनिया ने यह भी कहा कि यह भी गंभीर बात है कि जब महिला के परिजनों ने चिकित्सा विभाग को इस गंभीर लापरवाही जिसमें सुबह पॉजीटिव और शाम को निगेटिव आई बताने के बाद भी चिकित्सा विभाग ने कोई गंभीरता नहीं दिखाना विभाग को सवालों के घेरे में खड़ा करता है।

दादाबाड़ी डिस्पेंसरी पर भी बरती गंभीर लापरवाही
पीड़ित महिला अपूर्वा गौतम ने आरोप लगाया कि जिस दिन वो अपनी कोरोना जांच कराने के लिए दादाबाड़ी डिस्पेंसरी पहुंची, उस दिन वहां पर गंभीर लापरवाहियां देखने को मिली। उन्होंने बताया कि वहां पर जिस कुर्सी पर बैठाकर जांच की जा रही थी, उसे बार-बार सेनिटाईज तक नहीं किया जा रहा था, साथ ही वहां पर नाम लिखने वाले व्यक्ति को सही नाम तक लिखना नहीं आ रहा था, इसके साथ ही सोशल डिस्टेंस नाम की कोई चीज नहीं थी, सभी लोग पास-पास खड़े होकर लाइन में लगकर कोरोना जांच करा रहे थे, कोई तो बीच में ही घुसकर कोरोना की जांच करा रहा था। अपूर्वा गौतम ने कहा कि ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति यदि संक्रमित ना हो तो वो संक्रमित हो जाए, मतलब वहां पर कोई भी किसी को रोकने या टोकने के लिए गाइड करने वाला तक नहीं था।

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