कांग्रेस में नेतृत्व संकट के बीच आज कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक चल रही है. इस दौरान नेतृत्व के सवाल पर खुलकर बात हो रही है. बैठक के दौरान पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कह दिया है कि वो अब आगे पार्टी अध्यक्ष नहीं बने रहना चाहती हैं.

1991 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद ऐसे हालात बने कि पीवी नरसिम्हा राव को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया. पीवी नरसिम्हा राव 1992 से 1996 तक कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर रहे. मगर चुनाव में करारी हार के बाद उन्हें अध्यक्ष पद से हटाकर सीताराम केसरी को कांग्रेस की कमान सौंप दी गई. सीताराम केसरी 1996 से 1998 तक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे.

इस दौर में सोनिया गांधी के नाम की तूती बोलने लगी थी. उनका विदेशी होने का मुद्दा हावी हो रहा था और कांग्रेस से कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी से किनारा कर लिया था. विवादों के चलते सीताराम केसरी को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया और कांग्रेस की कमान सोनिया गांधी ने संभाल ली.

1998 से लेकर 2017 तक सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष लगातार चुनी गईं. लेकिन 2017 में अपनी उम्र और पार्टी को युवा नेतृत्व की जरूरत बताकर सोनिया गांधी ने पद छोड़ दिया. सोनिया गांधी के पद छोड़ने के बाद राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया.

राहुल गांधी 2017 से 2019 तक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे, मगर 2019 में लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद राहुल ने हार की जिम्मेदारी ली और कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ दिया. राहुल गांधी के पद छोड़ने के बाद साल 2019 में एक बार फिर सोनिया गांधी एक साल के लिए पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनाई गईं. और अब अंतरिम अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने और अपनी उम्र का हवाला देकर सोनिया गांधी ने एक बार फिर पद छोड़ने की बात की है. 

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